![]() |
| चौंकिए मत यह नाली नही सड़क है साहब |
महागामा : कहावत है किस्मत मेहरबान तो गदा भी पहलवान हो जाता है। मगर इस मार्ग की किस्मत की डोर शायद भ्रष्टाचारियो के चुंगल में बंद है। करीब चार वर्षों से संवेदक गहरी नींद मार रही है। संवेदक की लापरवाही का खामियाजा आसपास के ग्रामीण भुगत रहे हैं। संवेदक का क्या उन्होंने तो सड़क बनाया राशि निकाल लिया। अब सड़क मार्ग पर कोई पैदल भी चले या नही उसे किस बात की चिंता। पूरा सड़क का निर्माण हो गया लेकिन दो जगह एकाध किलोमीटर तक सड़क का निर्माण नही कराया गया जिस कारण बरसात के मौसम में सड़क पर पैदल चलना भी दुर्लभ हो जाता है।
बरसात के मौसम में अगर इस मार्ग पर मोटरसाईकिल दौड़ जाए तो आसपास के ग्रामीण ईद के चाँद की तरह देखने को व्याकुल हो जाते है और उसकी बहादुरी का चर्चा आपस में होने लगती हैं। सबके मन में एक ही सवाल उठता है कि सड़क की स्थिति इतनी खराब होने के बावजूद भी वाहन इस सड़क पर चल कैसे रहा है। इन सभी बातों की बानगी महागामा प्रखंड के नुनाजोर - परसा मुख्य मार्ग की है। जहाँ 2016 में नुनाजोर से परसा तक पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया गया था। सड़क बनने से इतने वर्ष गुजर गए की उनका बोर्ड या फिर संवेदक का नाम भी खत्म हो गया है।
![]() |
| ए भाई जरा संभल के, आगे भी कीचड़ है और पीछे भी |
दुर्भाग्य की बात तो यह है कि इसी मार्ग में दो जगह क्रमशः परसा के गझण्डा बाँध से मलियाचक हाट तक करीब एक किलोमीटर व बसंतराय प्रखंड के नकटा गांव से लेकर शाहपुर बेल्डिहा चौक तक एक किलोमीटर की दुरी तक सड़क का निर्माण चार साल गुजर जाने के बाद भी अब तक पूरा नही किया गया है। यह सड़क बसंतराय प्रखंड के भाया मेदनीचक होते हुए नुनाजोर तक है। करीब 16 किलोमीटर दुरी तक सड़क का निर्माण कराया जाना था लेकिन बिच बिच में दो किलोमीटर तक कार्य नही होने से सड़क अधूरा पड़ा हुआ है।
अंजान राहगीर तो कभी कभी नाली या बांध समझ कर वापस लौट जाते है। किसी भी दृष्टिकोण से उक्त जगह सड़क नही लगता है। उक्त सड़क सुचारू ढंग से आवागमन में तब्दील होने पर जिला मुख्यालय के साथ साथ बसंतराय प्रखंड, पथरगामा प्रखंड एवं महागामा जाने में बहुत सहूलियत होगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सूबे के गठबंधन की सरकार इस मार्ग को कब तक पूरा करने में सफल होती है।
- ब्यूरो रिपोर्ट, उजागर मीडिया।


0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें