बसंतराय में निर्मित जरी बैच से बेखबर झारखंड सरकार


बैच बनाते हुनरमंद कारीगर

बसंतराय : बसंतराय प्रखंड के हुनरमंद कारीगरों के हाथों से तैयार जरी से बने बैच न सिर्फ अपने देश में बल्कि विदेशों में भी काफी प्रचलित है। लेकिन सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा कढ़ाई बुनाई से जुड़ा यह कारोबार बंद होने के कगार पर पहुंचता दिख रहा है। बसंतराय में कढ़ाई कार्य से जुड़े हजारों हुनरमंद कामगार हैं । 

जो अपने कौशल के बल पर आजीविका चला रहे हैं और आत्मनिर्भर भी। मुहम्मद इसराइल इस धंधे से कई वर्षों से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बनायी जा रही बैच की मांग अमेरिका, रूस, इंग्लैंड,चाइना आदि देशों में ज्यादा है। इन देशों के पुलिस, आर्मी, एयरफोर्स, पारा मिलिट्री आदि के लिए वे सभी बैच बनाते हैं जो जरी से तैयार होती है।
विदेशों में प्रचलित बैच


इसके लिए विदेशी मांग कर्ताओं के पास पहले सैंपल भेजा जाता है, अगर सैंपल पसंद आ जाता है तो फिर वहां की सरकार से काफी संख्या में ऑर्डर मिलता है। 

 इस काम से जुड़े लोग प्रति दिन 500 से 600 रुपये तक कमा लेते है और जिनसे उनका परिवार चलता है।लेकिन देश में हुए तालाबंदी ने धंधा मंदा कर दिया है। बीते तीन माह से भी अधिक समय से बसंतराय में कढ़ाई का कारोबार  बिल्कुल बंदी के कागार पर आ गया है। 
ब्रिटेन का बैच


कहीं से कोई डिमांड नहीं है। मुहम्मद सद्दाम बताते है कि झारखंड सरकार के तरफ से कोई मदद नहीं मील पाई है। अगर हेमंत सोरेन सरकार मदद करे तो इस क्षेत्र में बहुत कुछ कर सकते है।और बड़ी आबादी को रोजगार भी मिल सकता है। लेकिन हालात के मारे इन होनहारों के पास फिलहाल कोई बड़ा काम का ऑडर नहीं है जिनके वजह से बमुश्किल 100 दो सौ कमा पाते है। अगर राज्य सरकार चाहे तो बसंतराय जैसे अति पिछड़ा क्षेत्र में हजारों कामगारों को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है।

- ब्यूरो रिपोर्ट, उजागर मीडिया।
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