मनरेगा के 20 साल: अधिकार, आत्मसम्मान और ग्रामीण विकास की मजबूत नींव

मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को दी आजीविका की गारंटी, पारदर्शिता और स्थायी परिसंपत्तियों से गांवों की अर्थव्यवस्था को मिली नई मजबूती - मंत्री दीपिका पांडे 



उजागर मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट गोड्डा: मनरेगा के 20 वर्ष पूरे होने पर झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने इसे ग्रामीण भारत के लिए अधिकार आधारित विकास की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना की वर्षगांठ नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों के सम्मान और आजीविका से जुड़ा मजबूत अधिकार है। पिछले दो दशकों में इस योजना ने गरीब, श्रमिक और वंचित वर्ग को रोजगार की गारंटी देकर उनके जीवन स्तर को स्थिरता दी है। मंत्री ने कहा कि मनरेगा अब सिर्फ मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, समयबद्ध कार्य और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण का प्रभावी माध्यम बन चुका है। आधार लिंक e-KYC युक्त जॉब कार्ड, मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान और 100 दिनों के काम का कानूनी अधिकार ये सभी प्रावधान इसे ग्रामीण सशक्तिकरण की रीढ़ बनाते हैं।

उन्होंने बताया कि कुआँ निर्माण, जल संरक्षण, तालाब, बागवानी और ग्रामीण संरचना से जुड़े कार्यों ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और पलायन रोकने में अहम भूमिका निभाई है। दीपिका पांडे सिंह ने केंद्र की भाजपा सरकार पर योजना का नाम बदलने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा दया नहीं, अधिकार है; रोजगार नहीं, आत्मसम्मान है और गांवों के विकास की सबसे मजबूत नींव है। माननीय मंत्री ने कहा कि मनरेगा ने पिछले दो दशकों में ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और वंचित परिवारों को रोजगार की गारंटी देकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिया है। लेकिन दुखद है कि मोदी सरकार लगातार मनरेगा को कमजोर करने और व्यावहारिक रूप से खत्म करने की दिशा में कदम उठा रही है, जो सीधे तौर पर गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है।

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About ब्यूरो गोड्डा (शमीम अहसन)

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