बड़े वादे-खाली झोली: केंद्रीय बजट पर मंत्री दीपिका पांडे का तीखा हमला, झारखंड के साथ भेदभाव का आरोप
बजट में वादों की चमक, लेकिन ज़मीन पर अंधेरा
उजागर मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट गोड्डा: केंद्रीय बजट को लेकर झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक बजट में बड़े-बड़े वादे किए जाते रहे हैं और सदन में आकर्षक घोषणाएँ रखी जाती हैं, लेकिन उनका वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई नहीं देता। यदि ये घोषणाएँ सच में लागू हों तो निश्चित रूप से यह स्वागतयोग्य होगा, परंतु अनुभव इसके विपरीत रहा है।
झारखंड के साथ क्यों सौतेला व्यवहार?
मंत्री ने आरोप लगाया कि झारखंड जैसे राज्यों के साथ पिछले कई वर्षों से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। राज्य का बकाया पैसा रोका जाना, केंद्रीय मद की राशि समय पर न मिलना और विकास योजनाओं में अनावश्यक अड़चनें पैदा करना चिंता का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में इस प्रकार का भेदभाव लगातार देखने को मिला है और मौजूदा बजट में भी केंद्र की मंशा स्पष्ट नहीं दिखती।
युवाओं, मजदूरों और महिलाओं के लिए ठोस योजना गायब
दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि इस बजट में मध्यम वर्ग और गरीब तबके को टैक्स के मोर्चे पर कोई ठोस राहत नहीं दी गई है। महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता को वास्तविक सहारा देने की जरूरत थी, जो नजर नहीं आता। उन्होंने युवाओं के रोजगार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बजट में यह स्पष्ट नहीं है कि नए रोजगार कैसे सृजित होंगे और नौकरी के अवसर कहाँ से आएंगे। साथ ही मजदूरों के अधिकारों के कमजोर होने पर भी चिंता जताई। मंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए भी कोई विशेष और प्रभावी पहल बजट में दिखाई नहीं देती।

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