बिहार में सरकारें बदलती रहीं,योजनाएं बदलती रहीं,लेकिन गांवों की तस्वीर आज भी नहीं बदली

 


भीषण गर्मी में जल संकट से जूझ रहे हैं गांव के लोग


कहलगांव/संवाददाता: बिहार में सरकारें बदलती रहीं, योजनाएं बदलती रहीं, लेकिन गांवों की तस्वीर आज भी नहीं बदली। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच गांव के लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के बजाय अपने माता-पिता के साथ पानी ढोने को मजबूर हैं। तस्वीर सन्हौला प्रखंड के बेलडीहा गांव की है, जहां आज भी यहां के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की समुचित सुविधा नहीं मिल पाई है। 

बेलडीहा गांव में आठ सरकारी चापाकल  है। जिसमें से एक ही चापाकल में गांव के लोग पानी भर पाते हैं। बाकी सात चापाकल जिन जिन लोगों के घर के आगे लगा है वह गांव के लोगों को पानी भरने नहीं देते हैं ,कई लोगों ने चापाकल में समरसेबल डाल लिया है तो कुछ लोगों ने दीवाल घेर कर चापाकल को अपने घर के अंदर कर लिया है।  ग्रामीण झगड़ा लड़ाई के डर से इसका विरोध नहीं कर पाते हैं। इस गांव में हर घर नल जल योजना स्कीम से पाइप बिछाई गई है लेकिन आज तक पानी नहीं आया है। जिसके कारण यहां के लोगों को निजी बोरिंग और दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर है। 

गांव की महिलाओं ने कहा कि चुनाव के समय मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच मिठा मिठा बात बोलकर वोट ले लेते हैं, जब पानी की समस्या के बारे में बोलते हैं तो चुप्पी साध लेते हैं। यहां के अधिकारी भी ध्यान नहीं देते हैं। समस्या जस की तस बनी हुई है। सबसे ज्यादा हम महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ रही है। सुबह होते ही गांव में पानी के लिए लाइन लग जाती हूं।कभी कभी आधा दिन सिर्फ पानी जुटाने में निकल जाता है। सरकार की हर घर नल का जल जैसी योजनाओं बेलडीहा में सिर्फ कागजों पर ही चल रही हैं।

इस मामले में विभाग के कनीय अभियंता अनिता कुमारी ने बताया कि जहां-जहां चापाकल को लोग अतिक्रमण कर लिए है उनका डाटा मांगा कर  अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।  आगे उन्होंने बताया कि जिस वार्ड की है समस्या है वह हर घर नल जल योजना से पानी मिलना है, क्या वजह है अब तक पानी नहीं पहुंच रहा है इसके बारे में भी रिपोर्ट मंगा कर आगे की कार्रवाई करेंगे।


- बालकृष्ण कुमार 

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