महागामा विधायक को दो बड़ी चुनौती, क्या समय रहते ये दो काम करा पायेगी


गोड्डा : महागामा विधानसभा क्षेत्र के विधायक दीपिका पांडेय सिंह को ये दो काम कराना चुनौती से कम नही है। पहला जहाँ आज़ादी के 72 वर्ष बाद भी गाँव वालों को सड़क नसीब नही हुआ है. वही दूसरी ओर हनवारा को प्रखंड बनाने कि मांग कई वर्षो से हो रहा है. लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधियों ने इसकी सुध अबतक नही ली है। कई जनप्रतिनिधियों ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया लेकिन ये दो काम पूरा नही कर पाए।

आपको बता दें कि जब दीपिका पाण्डेय सिंह कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के पद पर थीं तो उस समय हनवारा को प्रखंड बनाये जाने कि मांग को लेकर कई बार मोर्चा भी खोले थे। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बार जनता ने जिन्हें विधायक के रूप मे चुनकर विधानसभा पहुँचाया, क्या विधायक जी अब हनवारा को प्रखंड बनाये जाने को लेकर विधानसभा में अपनी आवाज बुलंद करेंगे। आईये अब हम आपको सीधा ले चलते है महागामा प्रखंड के उस गांव जहाँ आज़ादी के 72 वर्ष बाद भी गाँव वालो को सड़क नसीब नही हुआ।

जिन्हें मिला ‘आदर्श ग्राम’ का दर्जा वही सड़क विहीन, बेटी देने से कतराते है बाबुल  

  • शर्म तो आती है साहब पर क्या करूं,  
  • बताना भी तो जरूरी है, 
  • क्यूंकि मुझे मजबूरी है 

महागामा प्रखंड मुख्यालय स्थित परसा पंचायत के बिक्रामपुर गांव जहाँ आज़ादी के 72 वर्ष बाद भी इस गाँव में सड़क नही पहुंचा है। जिसे तत्कालीन कांग्रेस विधायक राजेश रंजन ने करीब सात वर्ष पूर्व बिक्रामपुर गांव को गोद लेकर 'आदर्श ग्राम' का दर्जा दिया था। दुर्भाग्य कि बात तो यह है कि गाँव को 'आदर्श ग्राम' का दर्जा तो मिल गया लेकिन गांव सड़क विहीन ही रह गया।

हालाँकि कुछ दिन बाद पूर्व विधायक अशोक कुमार भगत के द्वारा अपने कार्यकाल में उक्त गांव को एक एम्बुलेंस भी मुहैया कराया गया था, लेकिन उक्त गांव में सडक बनवाने में नाकाम साबित हुए। सडक ना होने के कारण एम्बुलेंस कभी गांव से बाहर नहीं निकल पाई। मानो एम्बुलेंस गांव की शोभा बढ़ा रही है। आप इसे राजनीतिक मजाक भी समझ सकते है।

 गांव वाले बताते है कि आज के जमाने मे कोई भी ऐसा गांव नही होगा जहां तक सड़क नही पहुंची हो, लेकिन गांव की इसी हालत को देखकर बेटी वाले अपने बेटी की शादी इस गांव में नही करना चाहते। सबके मुंह मे एक ही सवाल रहता है "बेटी रो शादी करियो आरो हम सब पछतायो, जोन गांव में सड़क नाय रहलो वो गाँव थोड़ी जंगल होलेय" यही बोल कर शादी नही करना चाहते। अगर किसी का शादी भी होता है तो सशर्त शादी करना पड़ता है कि शादी के बाद गांव में नही रहेंगे, कहीं दूसरे जगह घर बनाकर वहीं रहेंगे या फिर शहर में रहेंगे तब जाकर उसकी शादी हो पाती हैं।

इस मामले को लेकर कई अखबार एवं न्यूज़ चैनल के द्वारा कहानी के रूप में न्यूज़ भी चलाया गया था। न्यूज़ चलाने से फायदा ही कहाँ है  साहब जब सुध लेने वाला कोई ना हो तो? हालाँकि कुछ दिन पहले इस मामले को लेकर ट्विटर पर भी मुहीम छिड़ा था लेकिन आजतक उसका कोई असर देखने को नहीं मिला।

फाइल फोटो 


ये तस्वीर उस वक्त का बताया जा रहा है जब विधानसभा चुनावी सरगर्मी तेज़ था और क्षेत्र भ्रमण के दौरान दीपिका पांडेय सिंह बिक़रामपुर गांव पहुंची थी। गांव पहुँचने के लिए वो खुद मेढ़ों के सहारे गांव तक पहुंच पाई थी। देखते ही देखते मूसलाधार बारिश होने लगी गांव की हालत देख तब दीपिका पांडेय सिंह ने बीजेपी के विधायक को खूब कोसा था।

उन्होंने गांव वालों को यह भी आश्वासन दिया था कि अगर आपलोगों के आशीर्वाद से विधानसभा तक पहुंची तो सबसे पहले इस गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने का काम करूंगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि विधायक जी दोबारा उस गांव में सड़क बनवाकर जा पाएगी या फिर यह भी चुनावी जुमला बनकर रह जाएगी।

- ब्यूरो रिपोर्ट, उजागर मीडिया।
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