कहलगांव : श्रावण मास की अमावस्या की पूर्व संध्या के अवसर पर रविवार को कहलगांव अनुमंडल स्थित सनहौला प्रखंड के सनोखर बाजार निवासी आचार्य आशुतोष मिश्रा ने श्रावण मास के सोमवती अमावस्या व्रत का महत्व बताया। और उन्होंने कहा कि आयु , आरोग्य एवं ऐश्वर्य प्राप्ति हेतु श्रावण मास के अंतर्गत कृष्ण पक्ष का अंतिम दिवस सोमवती अमावस्या का व्रत समस्त सनातन धर्मावलंबी के लिए कल्याणकारी और समस्त प्रकार के शारीरिक कष्ट से उन्मूलन हेतु अत्यंत उत्तम है।
सोमवती अमावस्या के दिन देव वृक्ष पीपल की परिक्रमा, पीपल वृक्ष का पूजन करते हुए पीपल वृक्ष पर दुग्ध जल मिश्रित पदार्थ अवश्य अर्पित करना चाहिए। भौतिकवादी वर्तमान समय में भारतीय सनातन संस्कृति के शाश्वत गृहस्थ आश्रम में अधिकांश मानव जन किसी - न - किसी समस्या से अवश्य ग्रसित हैं । मानव जीवन में होने वाले समस्त कष्टों का वर्गीकरण मात्र तीन प्रकार से किया गया है । प्रथम हम देव दोष के ग्रसित हैं, द्वितीय हम ऋषि दोष से ग्रसित हैं या तृतीय हम पितृ दोष ग्रसित हैं ।
इन तीनों प्रकार की समस्याओं के समाधान हेतु हमें पीपल वृक्ष की परिक्रमा पूजा एवं उनसे अपने कष्ट उन्मूलन हेतु प्रार्थना पश्चात साष्टांग प्रणाम करते हुए निकटतम शिव पूजा स्थल पर शिवजी की पूजा विधि अनुसार बिना किसी प्राणी को कष्ट पहुंचाए करनी चाहिए । सोमवती अमावस्या श्रावण मास के सभी शुभ मुहूर्त में से एक अत्यंत शुभकारी मुहूर्त है। हम सभी मानव जन इस शुभ अवसर का अध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
- बालकृष्ण कुमार, उजागर मीडिया ब्यूरों कहलगांव।

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