सावन के रंग, मेंहदी के संग




  • बचपन से मुकबधिर पल्लवी मेहंदी रचने के साथ-साथ अन्य कलाओं में है निपुण


कहलगांव : सावन महीने में मेंहदी का खास महत्व है! कोरोनावायरस के भय से बेखबर शहर से लेकर गांव तक की महिलाएं सावन महीने में मेंहदी लगाकर लॉकडाउन का लुत्फ उठा रही है! प्राचीन काल से ही  सावन महीने में झूला झूलने और मेंहदी लगाने का विशेष महत्व है! जहां गांव में बच्चे बाग बगीचे में झूला झूलते हैं, वहीं शहर में चारदीवारी के अंदर लोग झूले का लुत्फ उठाते हैं! युवतियां सावन महीने में विशेष रुप से व्रत करते हुए मेंहदी लगाती है!

बातचीत के दौरान सन्हौला प्रखंड अंतर्गत सनोखर के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की युवतियों ने कहा कि मेंहदी के गहरे रंग से पति का प्रेम जुड़ा है! सनोखर बाजार निवासी अशोक गुप्ता की बचपन से मुकबधिर  पन्द्रह वर्षीय पुत्री पल्लवी अत्यंत सुंदर मेंहदी रचती है~ क्षेत्र की कई महिलाएँ उनसे मेंहदी लगवाती है! महिलाओं ने कहा कि पल्लवी बचपन से पढ़ाई के साथ - साथ  रंगोली बनाने, पेंटिंग एवं अन्य कई कलाओं में निपुण है!

- बालकृष्ण कुमार, उजागर मीडिया ब्यूरों कहलगांव।
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