सूबे के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को कांग्रेस के जिला सोशल मीडिया कॉर्डिनेटर अभिनव कुमार सिंह ने ट्विटर के जरिये यह बात पहुंचाई थी। तब मंत्री जी ने मामले को संज्ञान में लेकर उपायुक्त गोड्डा को इस अस्पताल को चालू करने का निर्देश दिया था। तत्कालीन उपायुक्त किरण कुमारी पासी ने त्वरित कार्यवाही करते हुए बीते 20 फरवरी को प्रखंड विकास पदाधिकारी महागामा धीरज प्रकाश के अगुवाई में टीम गठित कर उक्त अस्पताल का निरीक्षण करने का आदेश दिया था।
महागामा बीडीओ धीरज प्रकाश ने अस्पताल का निरीक्षण किया और अस्पताल को सुचारू रूप से चालू कराने के लिए आवश्यक उपकरणों का एक सूचि तैयार की गयी थी। जिसमे बिजली,पानी एवं स्वास्थ्य सबंधी उपकरण शामिल था। लेकिन चार महीने गुजर जाने के बाद भी अस्पताल जस का तस रखा हुआ है। ग्रामीणों का सपना था कि यह अस्पताल चालू होने से हमलोगों को बहुत सहूलियत होगी। लेकिन ग्रामीणों का सपना सपना बनकर ही रह गया वह हकीकत में अब तक नही बदल सका है। जब एक दशक बाद अस्पताल चालु होने की खबर ग्रामीणों को मिली थी तो ग्रामीण ख़ुशी के मारे झूम उठे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार परसा अस्पताल का निर्माण वर्ष 2010 में करीब 3 करोड़ रूपये की लागत से निर्माण कराया गया था। एक दशक हो जाने के बाद तक उक्त अस्पताल में कभी एक भी चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति नही हुई है। हाल में उक्त अस्पताल भुत बंगला में तब्दील हो गया है। इस अस्पताल को चालू नही होने के कारण मरीजो को इलाज करवाने के लिए 60 किलोमीटर दूर भागलपुर या 40 किलोमीटर दूर गोड्डा जाना पड़ता है। कई प्रसिद्ध अख़बार व न्यूज़ चैनलों में भी प्रमुखता से खबर चलाया जा चुका है।
गौरतलब हो की इस कोरोना जैसे वैश्विक महामारी ने अस्पताल चालु होने का सपना भी चकनाचूर कर गया। अस्पताल चालू होने का सारी प्रक्रिया लगभग शुरू हो गया था। लेकिन तभी कोरोना ने दस्तक दे दिया और पूरे देश में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू। जनता कर्फ्यू के बाद लगातार लॉकडाउन लगा रहा। उक्त अस्पताल चालू होने का सभी अरमान दिल ही दिल में रह गया
- जावेद अख्तर ब्यूरो, उजागर मीडिया।

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