नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ पूजा की हुई शुरूआत ....जाने विशेष


ब्यूरो रिपोर्ट जावेद
 हनवारा:    चार दिन तक चलने वाला महापर्व आज आस्था का पर्व छठ नहाय-खाय के साथ शुरू हो गई है। मालूम हो कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी  तिथि से ये आस्था का महापर्व शुरू हो जाता है। हर वर्ष छठ पूजा का त्यौहार दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाता है। 

यह आस्था का छठ पूजा व्रत खासतौर पर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रेदश और झारखंड में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। ज्ञात हो कि ये त्यौहार संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए रखा जाता है।हिन्दू समाज में यह त्यौहार को सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता हैं।

नहाय-खाय का विशेष होती महत्व 

छठव्रतियों से मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि आस्था का पर्व छठ पूजा में भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। चार दिनों के महापर्व छठ की शुरुआत नहाय-खाय (कद्दू भात) से होती है। इस दिन व्रती स्नान करके नए कपड़े धारण करती हैं और पूजा के बाद चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल को प्रसाद के तौर पर ग्रहण करती हैं।


 व्रती के भोजन करने के बाद परिवार के बाकी सदस्य भोजन करते हैं। नहाय-खाय के दिन भोजन करने के बाद व्रती अगले दिन शाम को खरना पूजा करती हैं। इस पूजा में महिलाएं शाम के समय लकड़ी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाकर उसे प्रसाद के तौर पर खाती हैं और इसी के साथ व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही घर में देवी षष्ठी (छठी मईया) का आगमन हो जाता है।

कहा जाय तो कुल मिलाकर यह पर्व चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाए के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है।


 इस दिन से स्वच्छता साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दूसरे दिन को लोहंडा-खरना कहा जाता है। इस दिन दिन-भर उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन किया जाता है। खीर गन्ने के रस की बनी होती है।

तीसरे दिन दिन भर उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है। चौथे दिन बिल्कुल उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है।

लेकिन इस वर्ष 2020 आस्था का महापर्व छठ पूजा कोरोना महामारी के कारण कुछ अलग तरह से ही मनाना होगा। छठ घाट जैसे नदी,तालाब,पोखर आदि जगहों पर सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक सोशल डिस्टेंस के साथ साथ मास्क और सेनिटाइजर का उपयोग करना होगा।

कोरोना का खतरा:-

इस बार करीब हर पर्व त्योहार को लोगों ने सतर्कता के साथ मनाया है।

राज्य सरकार का निर्देश:-

राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए इस बार छठ महापर्व भी मनाया जायेग।हालांकि मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने आस्था का महापर्व छठ पूजा में छूट देते हुए नदी,तालाबों ,जलाशयों में श्रद्धापूर्वक के साथ मनाने का आदेश देर शाम में दे दिए हैं।सीएम श्री सोरेन ने कहा-वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का खतरा अभी गया नहीं है।इसलिए सभी से आग्रह है आस्था के पर्व छठपूजा को श्रद्धालु सावधानी से मनाएं।सोशल डिस्टेंसिंग,मास्क पहनकर अन्य सावधानियां और हो सके तो इस बार ज्यादा से ज्यादा लोग घरों में पर्व मनाने की कोशिश करें।जिनके घरों में सुविधा नहीं है वही घाटों पर जाएं।कोरोना का ख़तरा अभी बना हुआ है।

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